इज़राइल के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित दो शहरों—अरद और डिमोना—पर ईरान द्वारा किए गए बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में 160 से अधिक लोग घायल हो गए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। इज़राइली आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, शनिवार शाम हुए इन हमलों के बाद अरद में 84 और डिमोना में 78 लोगों का इलाज जारी है। यह हमला ऐसे क्षेत्र में हुआ है जो रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि डिमोना के पास ही इज़राइल का प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थित है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने स्पष्ट किया है कि डिमोना से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित इस परमाणु अनुसंधान केंद्र को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है। इसके बावजूद इस हमले ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही परमाणु गतिविधियों के कारण संवेदनशील माना जाता है।
ईरान के सरकारी टेलीविजन ने दावा किया है कि यह हमला नतांज़ स्थित उसके परमाणु संयंत्र पर हुए हालिया हमले के जवाब में किया गया है। नतांज़ ईरान का एक प्रमुख परमाणु केंद्र है, जिस पर हुए हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव को और अधिक खतरनाक स्तर पर ले जा सकता है।
रविवार को भी ईरान ने इज़राइल के प्रमुख शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला किया, जिसमें कम से कम सात लोग घायल हुए। इस हमले के बाद इज़राइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने अरद का दौरा किया और ईरान पर तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 48 घंटों में ईरान ने नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाकर यह साबित कर दिया है कि वह पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकता है।
इज़राइल अपनी परमाणु क्षमता को लेकर आधिकारिक तौर पर न तो पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। हालांकि, स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के अनुसार, इज़राइल के पास लगभग 90 परमाणु वॉरहेड हैं, जिससे वह मध्य-पूर्व का एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न देश माना जाता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

