आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जितना फायदेमंद है, उतना ही खतरनाक भी साबित हो सकता है। खासकर तब, जब इसका इस्तेमाल अदालतों को गुमराह करने के लिए किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने AI से बनाए गए फर्जी ऑडियो, वीडियो और अन्य डिजिटल सबूतों को लेकर सख्त रुख अपनाया है और नई गाइडलाइंस जारी की हैं।
अब अगर कोई व्यक्ति वैवाहिक विवाद, घरेलू हिंसा, साइबर क्राइम या किसी आपराधिक मामले में AI-जनरेटेड झूठे सबूत पेश करता है, तो उस पर “साक्ष्य के साथ छेड़छाड़” जैसी गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है, जिसमें जेल की सजा भी शामिल है। अदालत ने साफ कहा है कि तकनीक का दुरुपयोग न्याय प्रक्रिया को कमजोर नहीं कर सकता।
इन मामलों से निपटने के लिए अब कोर्ट डिजिटल फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद ले रही है, ताकि यह जांचा जा सके कि सबूत असली है या AI से बनाया गया है। यह फैसला उन लोगों के लिए चेतावनी है जो डीपफेक और एडिटेड कंटेंट के जरिए केस को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश करते हैं।
यह वीडियो आपको बताएगा कि नया कानून क्या कहता है, किन मामलों में AI सबूत अपराध बन सकता है और आम लोग इससे कैसे सतर्क रह सकते हैं। वीडियो को अंत तक जरूर देखें और जागरूक बनें।

