भारत में आपराधिक न्याय प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू हो चुकी है और इसे लागू हुए डेढ़ साल से अधिक समय बीत चुका है। इस नए कानून का सबसे बड़ा उद्देश्य आम नागरिक को न्याय प्रणाली के केंद्र में लाना और पुलिस व कोर्ट की कार्यप्रणाली को ज्यादा पारदर्शी और तेज बनाना है।
BNS के तहत कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर पुलिस की कार्यशैली पर पड़ा है। अब ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज कराना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। इसका मतलब यह है कि अपराध कहीं भी हुआ हो, पीड़ित किसी भी थाने में जाकर एफआईआर दर्ज करा सकता है। इससे पुलिस टालमटोल नहीं कर सकती।
इसके अलावा, जांच प्रक्रिया में समय-सीमा तय की गई है, डिजिटल सबूतों को कानूनी मान्यता दी गई है और पीड़ित के अधिकारों को पहले से ज्यादा मजबूत किया गया है। नए कानून का मकसद सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि समय पर न्याय दिलाना है।
इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कि BNS के कौन से 5 बड़े बदलाव आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, पुलिस सिस्टम कैसे बदला है और आम आदमी को इससे क्या फायदे मिलते हैं। वीडियो को अंत तक जरूर देखें और इस अहम जानकारी को दूसरों तक भी पहुंचाएं।

